घोसला बना रहेगा | Moral Hindi Story For Kids | Hindi Kahani For Kids In Hindi Bachho Ki Kahani



घोसला बना रहेगा Importance Of Bird In Human Life | Moral Hindi Story


एक किसान के घर मे मैना ने घोसला बनाया सूरज की रोसनी इसपे सीधी पड़ती थी नन्हे नन्हे चार बच्चे अपने निकलते पंखों को फड़फड़ाते और चीखकर चीलाने लगते घोसला बहूत गंदा था, उसमें कूड़ा-करकट भरा हुआ था इसमें टहनिया थी|

सन के टुकड़े थे कागजों के टुकड़े और कपड़ों के चिथड़े। किसान की पत्नी के लिए यह एक गंदा घोंसला था। उसकी सफाई पसंद आँखों के लिए यह एक परेसानी का कारण था। लेकिन स्वर्ग के सारे सुख मैना के बच्चों के लिए यही थे। मैना के बच्चे इसमें आराम से रहते थे।


दिन में बच्चों के हिलने-डुलने से जब घोंसले के नीचे गंदगी इकट्ठी हो जाती तो किसान की घरवाली चीख उठती, "मैं कहां तक झाड़ू लगाऊँ।" घोसले से मेरा काम बढ़ जाता है। कल इसे न रहने दूँगी सुबह झाड़ू लगते, घोसले हटाने की उसे सूझती, लकिन प्यारे-प्यारे नन्हे बच्चे खुशी से चिल्लाते जैसे गा रहे हों।

किसी को झांकते हुए देखकर वो चौकन्ने हो जाते। आकाश को सिर पर उठाने वाली चीख से चिल्लाते और किसान की घरवाली को लगता कोई उसके अपने बच्चों को सता रहा है। घोंसला हटाने के प्रयास में वह सहम जाती। उसके हाथ फिसल जाते। वह बड़बड़ाती।

दूसरी तरफ़ से बच्चे चिल्लाते किकी, किकी चर्र-चर्र, चर्र कीक, कीक, कोक, कोक। अपने सिर को उठाते, गर्दन को हिलाते और पंखों को हिलाते। जब किसान घर में आता तो उसे शिकायतें परोसी जातीं। उसकी पत्नी कहती ‘‘आज रामू ने श्यामू को ढकेल दिया। उसकी माँ ने शिकायत की।

रामू स्कूल नही जाता। बड़ा शरारती हो गया है। मेरी तो मानता ही नहीं। मुँह बिचकाता है। डाँटती हुँ तो गला फाड़कर चिल्लाने लगता है बड़ी आप़्फ़त है।’’ इससे थका किसान, परेशान होकर जवाब देता, ‘तुम न जाने मुझे क्या समझती हो। पिटवाने के लिए शिकायतें लेकर बैठ जाती हो।

बच्चों को प्यार से समझाओ, साथ रखो और देखभाल करो। देखो, सामने मैना अपने बच्चों को खिला रही है। छोटे बच्चे उड़ना सीख रहे हैं। उन्हें हरे टिड्डे पकड़ने का चस्का लग गया है। अब उन्हें डर नहीं लगता, पहले जैसी झिझक भी चली गई।

मैना ने किस तरह उन्हें सिखाया है।’’ ‘‘रहने भी दो किसान की पत्नी चिल्लाई, मुझसे नहीं सँभलते ये शैतान बच्चे।’’ ‘‘शैतान हैं पर हमारे हैं।’’ माँ-बाप की तकरार रामू सुन रहा था। वह भी सोचता था, ‘‘अगर वह मैना का बच्चा होता तो उसे माँ-बाप का प्यार ज्यादा मिलता। वे कितने प्यार से बच्चों को चुगाते हैं।

छोटे कीड़े, गुबरैले कीड़े, घुन और हरे-हरे टिड्डे। इनके माँ-बाप आपस में नहीं लड़ते।’’ किसान की पत्नी ने फिर से बात उठाई। ‘‘मैं इनके घोंसले को नहीं रहने दूँगी। सारी गंदगी मुझे बुहारनी पड़ती है इनके कारण ही तुम्हारी शिक्षा की कड़वी दवा मिलती है।’’

किसान जिसे रोटी मिलने का अंदेशा था बोला, ‘‘जैसा चाहो करो, मुझे खेतों पर जाना है।’’ किसान की पत्नी रोटी बनाने में लग गई। बाहर किसान घोंसले को देख रहा था। एक कौआ झपटा, मैना चीखी। उसने बचाव किया। नर-मादा दोनों ही जुट पड़े। कौआ लौट गया।

किसान सोच रहा था मैना अपने बच्चों का कितना ध्यान रखती है। उसका ध्यान पलटा। उसने सराहा उन बच्चों को जिनसे माँ-बाप को खुशी मिलती है। जिन बच्चों की शिकायतें आती हैं जो बच्चे नहीं पढ़ते, माँ-बाप को दुख देते हैं, इसे बच्चे नहीं जानते।

वे माता-पिता भाग्यशाली हैं, जिनके बच्चे अपने-आप पढ़ते हैं और अच्छे काम करते हैं। किसान नर-मादा को देख रहा था। कितने ध्यान से वे बच्चे को पालते हैं, परेशानियों से बचाते हैं, कैसे-कैसे तरीकों से सिखाते हैं। किसान उठकर अंदर गया।

उसने देखा रामू अपनी माँ के पास बैठा है। उसने सुना, रामू अपनी माँ से पूछता है-मा!, मैना के नर-मादा कैसे पहचाने जाते हैं? उसकी माँ कुछ भी बोलती ही नहीं है।

किसान बड़े प्यार से बच्चे के पास पहुँचा और उसने बड़े प्यार के साथ कहा, ‘‘नर-मादा एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनकी पहचान है-मादा मैना के कंधे के पर चौड़े होते हैं और सिर थोड़ा बड़ा होते है।’’ रामू बाहर भागा। पहचानने के लिए वह घोंसले को देखने लगा।

किसान अपनी पत्नी को मना रहा था तभी किसी ने सूचना दी, टिड्डी दल आ रहा है। किसान बाहर आया। उसकी पत्नी बाहर आई। आसमान में टिड्डियाँ ही टिड्डियाँ नजर आ रही थीं। फ़सल को बेहद खतरा था, अचानक भयानक हमला। किसान घबरा गया। उसकी पत्नी परेशान थी।

आसमान में अँधेरा छा गया। इन दोनों की आँखों के आगे भी अँधेरा था। आशाओं के सूरज को टिड्डियों ने छेक लिया था। तभी उन दोनों ने देखा। नर-मादा मैना बच्चों के साथ निकले। किसान के दानों पर पलने वाले ये निरीह और उपेक्षित जीव, किसान के घर में घोंसला बनाने वाले ये पक्षी जुट पड़े टिड्डियों को मारने।

किसान को खुशी हुई। रामू भी खुश था। माँ-बापू की लड़ाई खत्म हो गई थी। किसान ने पत्नी से कहा, ‘‘देखो, ये हमारा कर्ज चुका रहे हैं।’’ किसान की पत्नी ने कहा, ‘‘मैना टिड्डियों को तो खाते ही हैं इसमें हम पर उनका क्या अहसान?’’ किसान ने सोचा, कैसे समझाऊँ?

उसने कहा, ‘‘लेकिन तुम इनके घोंसले को तो नहीं हटाओगी, हटा दो, अभी हटा दो, गंदगी फैलती है।’’ लेकिन किसान की पत्नी ने कहा, ‘‘नहीं-नहीं, घोंसला बना रहेगा। घोंसला बना रहेगा।’’ शायद वो समझ चुकी थी।

सर्वश्रेठ कौन | Sarvashrehth Kaun | Who is the Best | Hindi Story | Hindi Stories | Hindi Kahani


सर्वश्रेष्ठ कौन है? ब्रह्मांड में सभी ग्रह, उपग्रह, पुच्छल तारे और उल्काएं मंच पर मौजूद हैं। सूर्य सिंहासन पर बैठा है। एक तरफ सभी ग्रह क्रमशः सूर्य से दूरी के अनुसार बैठे हैं। दूसरी तरफ़ चाँद, सितारों और उल्काओं का पुंज बैठा है।

(बुध को देखते हुए) - मंत्री बुध, सम्मेलन शुरू किया जा सकता है। अपने आदेश के रूप में सूर्य देव! राजा! सभी ग्रहों में, इस बात पर बहस चल रही है कि ब्रह्मांड में सबसे अच्छा कौन है? सभी एक-दूसरे को व्यक्त करने में लगे हुए हैं। (सिर पकड़कर) मेरी कोई नहीं सुनता।

अब आप ही बताएं कि इस मामले पर फैसला कैसे किया जाए? (मुस्कुराते हुए) यह तय करना बहुत आसान है। उन सभी को बारी-बारी से अपने बारे में बताने का मौका दिया जाता है। जो कोई भी यह साबित करेगा कि उसके पास उच्चतम गुणवत्ता है, वह सबसे अच्छा होगा।

मंत्री बुध! तुम मेरे सबसे करीब हो। तो ... आप इसे खुद से क्यों नहीं शुरू करते? (शर्माते हुए) आपके आदेश के रूप में सूर्य देव महाराज मैं आपका पड़ोसी और सभी ग्रहों में सबसे छोटा हूं।

लेकिन मेरी गति सबसे तेज है। मैं वजन में बहुत हल्का हूं, लेकिन आप के रूप में गर्मी में गर्मी से थोड़ा कम है, लेकिन अन्य ग्रहों की तुलना में बहुत अधिक है यह बात बिलकुल वाजिब है। मैं हमेशा तुम्हारे इर्द-गिर्द घूमता हूं, लेकिन मैं तुम्हें कभी अपनी पीठ नहीं दिखाता।

मैं आपको केवल 88 दिनों में ले जाता हूं। तो इसके द्वारा आप शायद ..... (हकलाते हुए) मैं ..... हूँ ..... मैं सबसे अच्छा हूँ। आपके इन गुणों के कारण आप मेरे मंत्री हैं। अब आप मुझे एक अच्छे मंत्री के रूप में निर्णय लेने में सहयोग करें। 

ठीक है महाराज, मैं अब शुक्र को आमंत्रित करता हूं। कि वे आपको अपनी विशेषताएं बताएं (झुकते हुए) धन्यवाद महाराज! मैं इस ब्रह्मांड का सबसे चमकीला ग्रह हूं। पृथ्वी के लोग मुझे पृथ्वी के जुड़वां भाइयों के रूप में मानते हैं।

फिर इस विश्वास में संदेह कैसे हो सकता है कि मैं सर्वश्रेष्ठ हूं? दार सर! शुक्र! यह मत भूलो कि मैं हरा हूं और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हूं। पानी देने वाला जीवन मुझ पर मौजूद है, मेरे पास हवा है और सभी में एक चंद्रमा भी है। 

इस तरह, पृथ्वीवासी मुझ पर पानी, हवा, वनस्पति और जीवन की संभावना भी देख रहे हैं। मेरा रंग लाल है और मैं सौर मंडल का सबसे गूढ़ ग्रह हूं। राजा ! मेरा आकार किसी से छिपा नहीं है। (पृथ्वी की ओर देखते हुए) मैं इतना विशाल हूं कि मुझ में 1350 पृथ्वी को एक साथ रखा जा सकता है। 

मुझे सूर्य देव के चक्कर लगाने में 12 साल का समय लगता है। संक्षेप में, मैं कह सकता हूं कि मैं संपत्तियों का भंडार हूं। (इस समय, शनि गर्व से चक्कर के बीच में बोलते हैं) मेरी आकृति कितनी सुंदर है और मेरी छाया कितनी सुंदर है राजा ! मेरे पास एक या दो चांद नहीं हैं, मेरे पास सैकड़ों चांद हैं।

मेरे क्रोध के कारण, सभी व्यक्ति भय के कंपन से कांपते हैं, मुझे प्रसन्न करने के लिए लोग पूजा और दान - दान देते हैं। सूर्य देव! मुझे सभी यूरेनस के नाम से जानते हैं। मैं तुमसे बहुत दूर हूँ। मुझे 1718 में अंग्रेजी खगोलशास्त्री विलियम हर्शल ने खोजा था। राजा! अब मैं इन बड़े - बड़े दिग्गजों के सामने क्या कह सकता हूँ?

मैं तुमसे बहुत दूर हूँ, इसलिए मुझमें गर्मी बहुत कम है। लेकिन मैं 17 बार वेटियर हूं फिर पृथ्वी। मुझे किसी नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। इसलिए मैं सर्वश्रेष्ठ बनने की दौड़ में भी शामिल हूं। राजा! मैं प्लूटो भी कहता हूं मैं शायद सौर परिवार का आखिरी सदस्य हूं।

मैं तुमसे बहुत दूर हूं मुझे तुम्हारे चक्कर लगाने में 250 साल लग गए। राजा! मेरे साथ अन्याय हुआ है। पहले मुझे बुध, शुक्र आदि ग्रह की उपाधि दी गई थी। लेकिन कुछ साल पहले मुझसे यह खिताब छीन लिया गया था। (दुख के साथ) मेरे साथ न्याय करो भगवान सूर्य! मुझे सबसे अच्छा चुनें।

सभी का पक्ष सुनने के बाद, मुझे लगता है कि सभी ग्रह, और उपग्रहों आदि का सौर मंडल में समान महत्व है। इन सभी का निर्माण सौरमंडल और ब्रह्मांड की रचना है। इनमें से कोई भी बड़ा और कोई भी छोटा नहीं है। जैसे कई सुंदर माला बहुत सुंदर माला बनाते हैं।

इसी प्रकार सभी ग्रह - उपग्रह आदि मिलकर एक ब्रह्मांड बनाते हैं। सभी अपने-अपने कामों में लगे हैं। इसलिए सभी श्रेष्ठ हैं, सभी महान हैं। (सभी एक साथ) भगवान सूर्य की जय हो! भगवान सूर्य की जय हो! (इसके साथ ही पर्दा गिर जाता है और विधानसभा समाप्त हो जाती है।)
Share To:

Admin,Brajkishor

Post A Comment: