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भूतों की कहानियाँ | Horror Kahaniya | Bhoot Ki Kahani |Hindi Story
भूतों की कहानियाँ | Horror Kahaniya | Bhoot Ki Kahani |Hindi Story 


भूतों का मेला

बाबा मुझे माफ कर दो ! मैं इसे छोड़ कर चला जाऊँगा ! गुरू साहेब बाबा की समाधि का चक्कर लगाती वह पागल सी युवती की करूण वेदना ! कौन है जो इस महिला के माध्यम से बाबा से प्रार्थना कर रहा है? वह युवती पास के गांव की रहने वाली थी। उस युवती को जब भी वह अदृश्य आत्मा परेशान करती थी तो उसे होश तक नहीं रहता था। उसे संभालने के लिए उसके परिजन उसके साथ थे।

रामचर्चा भाग 14 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story
रामचर्चा भाग 14 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story


रामचर्चा भाग 14 

सीता का हरा जाना
यह कहकर लक्ष्मण तो चल दिये। रावण ने जब देखा कि मैदान खाली है, तो उसने एक हाथ में चिमटा उठाया। दूसरे हाथ में कमण्डल लिया औरनारायण, नारायण !’ करता हुआ सीता जी की कुटी के द्वार पर आकर खड़ा हो गया। सीताजी ने देखा कि एक जटाधारी महात्मा द्वार पर आये हैं, बाहर निकल आयी और महात्मा को परणाम करके बोलींकहिये महाराज, कहां से आना हुआ !


रामचर्चा भाग 13 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story
रामचर्चा भाग 13 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story


रामचर्चा भाग 13

सबेरे रामचन्द्र जी उठे तो राक्षसों की सेना आते देखी। आज का युद्ध कल से अधिक भीषण होगा, यह उन्हें ज्ञात था। सीता जी को उन्होंने एक गुफ़ा में छिपा दिया और दोनों आदमी पहाड़ के ऊपर च़कर राक्षसों पर तीर चलाने लगे। उनके तीर ऊपर से बिजली की तरह गिरते थे और एक साथ सैकड़ों को धराशायी कर देते थे। खर और दूषण अपनी सेना को ललकारते थे, ब़ावा देते थे, किन्तु उन अचूक तीरों के सामने सेना के कलेजे दहल उठते थे। 

रामचर्चा भाग 12 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story
रामचर्चा भाग 12 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story


रामचर्चा भाग 12

दंडकवन
भरत के चले आने के बाद रामचन्द्र ने भी चित्रकूट से चले जाने का निश्चय कर लिया! उन्हें विचार हुआ कि अयोध्या के निवासी वहां बराबर आतेजाते रहेंगे और उनके आनेजाने से यहां के ऋषियों को कष्ट होगा। तीनों आदमी घूमते हुए अत्रि मुनि के पास पहुंचे। अत्रि ईश्वरपराप्त एक वृद्ध थे। उनकी पत्नी अनुसूया भी बड़ी बुद्धिमती स्त्री थीं। उन्होंने सीताजी को स्त्रियों के कर्तव्य समझाये और बड़ा सत्कार किया। तीनों आदमी यहां कई महीने रहकर दंडकवन की ओर चले। इस वन में अच्छेअच्छे ऋषि रहते थे। रामचन्द्र उनके दर्शन करना चाहते थे।

रामचर्चा भाग 11 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story
रामचर्चा भाग 11 | मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ | Hindi Story


रामचर्चा भाग 11 

भरत और रामचन्द्र

इधर भरत अयोध्यावासियों के साथ राम को मनाने के लिए जा रहे थे। जब वह गंगा नदी के किनारे पहुंचे, तो भील सरदार गुह को उनकी सेना देखकर सन्देह हुआ कि शायद यह रामचन्द्र पर आक्रमण करने जा रहे हैं। तुरन्त अपने आदमियों को एकत्रित करने लगा। किन्तु बाद को जब भरत का विचार ज्ञात हुआ तो उनके सामने आया और अपने घर चलने का निमन्त्रण दिया।

साइकिल की सवारी | सुदर्शन | Hindi Story | Hindi Story For Kids
साइकिल की सवारी | सुदर्शन | Hindi Story | Hindi Story For Kids


साइकिल की सवारी

सुदर्शन

भगवान ही जानता है कि जब मैं किसी को साइकिल की सवारी करते या हारमोनियम बजाते देखता हूँ तब मुझे अपने ऊपर कैसी दया आती है। सोचता हूँ, भगवान ने ये दोनों विद्याएँ भी खूब बनाई हैं। एक से समय बचता है, दूसरी से समय कटता है। मगर तमाशा देखिए, हमारे प्रारब्ध में कलियुग की ये दोनों विद्याएँ नहीं लिखी गईं। न साइकिल चला सकते हैं, न बाजा ही बजा सकते हैं। पता नहीं, कब से यह धारणा हमारे मन में बैठ गई है कि हम सब कुछ कर सकते हैं, मगर ये दोनों काम नहीं कर सकते हैं।

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